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25.1.20

Sad shyari


    दिल लेने बाली दिल्ली चली गई
जब दिल लेने दिल्ली गया तो ओ इटली चली गई
जब मन किया जाना दे दून बिजली की तार छू कर
बिजली छूआ तो बिजली चली गई
      Sad shayari
Heart takers She moved to DelhiWhen heart went Delhi.
So she moved to Italy.
I felt like touching the electric wire. The power went away when it touched.



Mother and father of Lord Shiva.


        जो समय की चाल हैं, अपने भक्तों की ढाल हैं,
            पल में बदल दे सृष्टि को, वो महाकाल हैं।
            हर हर महादेव
         आज हम आपको बाबा महाकाल का पिता जी और उनके माता का नाम बताएं गे
          आइये जानते हैं आगे........
              जैसे की आप जानते हो की धरती की संरचना एक ग्रह के टकराने से हुआ है
            पर कुछ लोग का कहना है की धरती की संरचना भगवान शिव ने की है
           पर आप लोग ये भी सोंचते होंगे की शिव भगवान कान्हा से आयें
            तो भगवान शिव जी के पिता भी हैं और उनकी माता जी भी हैं
           भगवान शिव जी के पिता का नाम सदाशिव है और उनकी माँ का नाम अस्तगामनी है
                आगे हम आपको महाकाल बाबा के बिसेष जानकारी देंगे।
                                           धन्यवाद आपका

24.1.20

Mother and father of Lord Shiva.


        जो समय की चाल हैं, अपने भक्तों की ढाल                           हैं,
            पल में बदल दे सृष्टि को, वो महाकाल हैं।
            हर हर महादेव
             
आज हम आपको बाबा महाकाल का पिता जी और उनके माता का नाम बताएं गे
          आइये जानते हैं आगे........
              जैसे की आप जानते हो की धरती की संरचना एक ग्रह के टकराने से हुआ है
            पर कुछ लोग का कहना है की धरती की संरचना भगवान शिव ने की है
           पर आप लोग ये भी सोंचते होंगे की शिव भगवान कान्हा से आयें
            तो भगवान शिव जी के पिता भी हैं और उनकी माता जी भी हैं
           भगवान शिव जी के पिता का नाम सदाशिव है और उनकी माँ का नाम अस्तगामनी है
                आगे हम आपको महाकाल बाबा के बिसेष जानकारी देंगे।
                                           धन्यवाद आपका

23.1.20

              Wo Kya Jaane, Yaadon Ki Keemat, 
Jo Khud Yaadon Ko Mita Diya Karte Hain,
           Yaado Ka Matlab To Unse Poochho Jo,
Yaadon Ke Sahare Jiya Karte Hain....

22.1.20

History of patna


वर्तमान बिहार राज्य की राजधानी पटना को ३००० वर्ष से लेकर अबतक भारत का गौरवशाली शहर होने का दर्जा प्राप्त है। यह प्राचीन नगर पवित्र गंगानदी के किनारे सोन और गंडक के संगम पर लंबी पट्टी के रूप में बसा हुआ है। इस शहर को ऐतिहासिक इमारतों के लिए भी जाना जाता है। पटना का इतिहास पाटलीपुत्र के नाम से छठी सदी ईसापूर्व में शुरू होता है। तीसरी सदी ईसापूर्व में पटना शक्तिशाली मगध राज्य की राजधानी बना। अजातशत्रुचन्द्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोकचंद्रगुप्त द्वितीयसमुद्रगुप्त यहाँ के महान शासक हुए। सम्राट अशोक के शासनकाल को भारत के इतिहास में अद्वितीय स्‍थान प्राप्‍त है। पटना एक ओर जहाँ शक्तिशाली राजवंशों के लिए जाना जाता है, वहीं दूसरी ओर ज्ञान और अध्‍यात्‍म के कारण भी यह काफी लोकप्रिय रहा है। यह शहर कई प्रबुद्ध यात्रियों जैसे मेगास्थनिजफाह्यानह्वेनसांग के आगमन का भी साक्षी है। महानतम कूटनीतिज्ञ कौटिल्‍यने अर्थशास्‍त्र तथा विष्णुशर्मा ने पंचतंत्र की यहीं पर रचना की थी। वाणिज्यिक रूप से भी यह मौर्य-गुप्तकाल, मुगलों तथा अंग्रेजों के समय बिहार का एक प्रमुख शहर रहा है। बंगाल विभाजन के बाद 1912 में पटना संयुक्त बिहार-उड़ीसा तथा आजादी मिलने के बाद बिहार राज्‍य की राजधानी बना। शहर का बसाव को ऐतिहासिक क्रम के अनुसार तीन खंडों में बाँटा जा सकता है- मध्य-पूर्व भाग में कुम्रहार के आसपास मौर्य-गुप्त सम्राटाँ का महल, पूर्वी भाग में पटना सिटी के आसपास शेरशाह तथा मुगलों के काल का नगरक्षेत्र तथा बाँकीपुर और उसके पश्चिम में ब्रतानी हुकूमत के दौरान बसायी गयी नई राजधानी
पटना का भारतीय पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्‍थान है। महात्मा गांधी सेतु पटना को उत्तर बिहार तथा नेपाल के अन्‍य पर्यटन स्‍थल को सड़क माध्‍यम से जोड़ता है। पटना से चूँकि वैशालीराजगीरनालंदाबोधगयापावापुरी और वाराणसी के लिए मार्ग जाता है, इसलिए यह शहर हिंदूबौद्ध और जैन धर्मावलंबियों के लिए पर्यटन गेटवे' के रूप में भी जाना जाता है। ईसाई धर्मावलंबियों के लिए भी पटना अतिमहत्वपूर्ण है। पटना सिटी में हरमंदिर, पादरी की हवेली, शेरशाह की मस्जिद, जलान म्यूजियम, अगमकुँआ, पटनदेवी; मध्यभाग में कुम्‍हरार परिसर, पत्थर की मस्जिद, गोलघर, पटना संग्रहालय तथा पश्चिमी भाग में जैविक उद्यान, सदाकत आश्रम आदि यहां के प्रमुख दर्शनीय स्‍थल हैं।

आधुनिक पटना नाम पठान शासक शेरशाह सूरी की देन है , उसने इसका नाम पैठना रखा था जिसे शेर शाह के मृत्यु के पश्चात् अंतिम हिन्दु सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य ने पटना कर दिया।पटना संसार के गिने-चुने उन विशेष प्राचीन नगरों में से एक है जो अति प्राचीन काल से आज तक आबाद है।
अपने आप में इस शहर का ऐतिहासिक महत्व है। ईसा पूर्व मेगास्थनीज(350 ईपू-290 ईपू) ने अपने भारत भ्रमण के पश्चात लिखी अपनी पुस्तक इंडिका में इस नगर का उल्लेख किया है। पलिबोथ्रा (पाटलिपुत्र) जो गंगा और अरेन्नोवास (सोनभद्र-हिरण्यवाह) के संगम पर बसा था। उस पुस्तक के आकलनों के हिसाब से प्राचीन पटना (पलिबोथा) 9 मील (14.5 कि॰मी॰) लम्बा तथा 1.75 मील (2.8 कि॰मी॰) चौड़ा था।
पटना बिहार राज्य की राजधानी है और गंगा नदी के दक्षिणी किनारे पर अवस्थित है। जहां पर गंगा घाघरासोन और गंडक जैसी सहायक नदियों से मिलती है। [4]
सोलह लाख (2011 की जनगणना के अनुसार 1,683,200) से भी अधिक आबादी वाला यह शहर, लगभग 15 कि॰मी॰ लम्बा और 7 कि॰मी॰ चौड़ा है।[5][6]
प्राचीन बौद्ध और जैन तीर्थस्थल वैशालीराजगीर या राजगृह, नालन्दाबोधगया और पावापुरी पटना शहर के आस पास ही अवस्थित हैं। पटना सिक्खों के लिये एक अत्यन्त ही पवित्र स्थल है। सिक्खों के 10वें तथा अंतिम गुरु गुरू गोविन्द सिंह का जन्म पटना में हीं हुआ था। प्रति वर्ष देश-विदेश से लाखों सिक्ख श्रद्धालु पटना में हरमन्दिर साहब के दर्शन करने आते हैं तथा मत्था टेकते हैं।
पटना एवं इसके आसपास के प्राचीन भग्नावशेष/खंडहर नगर के ऐतिहासिक गौरव के मौन गवाह हैं तथा नगर की प्राचीन गरिमा को आज भी प्रदर्शित करते हैं।
ऐतिहासिक और प्रशासनिक महत्व के अतिरिक्त, पटना शिक्षा , चिकित्सा, और वाणिज्यिक का भी एक प्रमुख केंद्र है। दिवारों से घिरा नगर का पुराना क्षेत्र, जिसे पटना सिटी के नाम से जाना जाता है ।